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Welcome to St. Cuthberts' church!

Today's reading is from Isaiah 6. 

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Reading: Isaiah 6

1Në vitin e vdekjes së mbretit Uziah, unë pashë Zotin të ulur mbi një fron të ngritur dhe të lartë, dhe cepat e mantelit të tij mbushnin tempullin. 2Mbi të ishin serafinët; secili prej tyre kishte gjashtë krahë: me dy mbulonte fytyrën, me dy të tjerë këmbët dhe me dy fluturonte.

3Njeri i bërtiste tjetrit dhe i thoshte: "I Shenjtë, i shenjtë, i shenjtë është Zoti i ushtrive. Tërë toka është plot me lavdinë e tij".

4Shtalkat e portës u tronditën nga zëri i atij që bërtiste, ndërsa tempulli po mbushej me tym.

5Atëherë unë thashë: "I mjeri unë! Unë jam i humbur, sepse jam një njeri me buzë të papastra dhe banoj në mes të një populli me buzë të papastra; megjithatë sytë e mi kanë parë Mbretin, Zotin e ushtrive".

6Atëherë një nga serafinët fluturoi drejt meje, duke mbajtur në dorë një urë zjarri, që kishte marrë me mashë nga altari. 7Me të ai preku gojën time dhe tha: "Ja, kjo preku buzët e tua, paudhësia jote hiqet dhe mëkati yt shlyhet".

8Pastaj dëgjova zërin e Zotit që thoshte: "Kë të dërgoj dhe kush do të shkojë për ne?". Unë u përgjigja: "Ja ku jam, dërgomë mua!".

9Atëherë ai tha: "Shko dhe i thuaj këtij populli: Dëgjoni, pra, por pa kuptuar, shikoni, pra, por pa dalluar.

10Bëje të pandieshme zemrën e këtij populli, ngurtëso veshët e tij dhe mbyll sytë e tij që të mos shikojë me sytë e tij, të mos dëgjojë me veshët e tij dhe të mos kuptojë me zemrën e tij, dhe kështudo të kthehet dhe të jet shëruar".

11Unë thashë: "Deri kur, o Zot?". Ai u përgjigj: "Deri sa qytetet të shkatërrohen dhe të jenë pa banorë, shtëpitë të mos kenë njeri dhe vendi të jetë i shkretuar dhe i pikëlluar,

12dhe deri sa Zoti të ketë larguar njerëzinë dhe të jetë një braktisje e madhe në mes të vendit.

13Do të mbetet akoma një e dhjeta e popullsisë, por edhe kjo do të shkatërrohet; por ashtu si bafrës dhe lisit, kur priten u mbetet cungu, kështu një brez i shenjtë do të jetë trungu i tij".

 
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Bulgarian
(български)
Reading: Luke 17

1В годината, когато умря цар Озия видях Господа седнал на висок и издигнат престол, и полите Му изпълниха храма. 2Над Него стояха серафимите, от които всеки имаше по шест крила; с две покриваше лицето си, с две покриваше нозете си, и с две летеше.

3И викаха един към друг, казвайки:- Свет, свет, свет Господ на Силите! Славата Му пълни цялата земя.

4И основите на праговете се поклатиха от гласа на оня, който викаше, и домът се напълни с дим.

5Тогава рекох: Горко ми, защото загинах; понеже съм човек с нечисти устни, и живея между люде с нечисти устни, понеже очите ми видяха Царя, Господа на Силите.

6Тогава долетя при мене един от серафимите, като държеше в ръката си разпален въглен, що бе взел с щипци от олтара. 7И като го допря до устата ми, рече: Ето, това се допря до устните ти; и беззаконието ти се отне, и грехът ти се умилостиви.

8После чух гласа на Господа, който казваше: Кого да пратя? и кой ще отиде за Нас? Тогава рекох: Ето ме, изпрати мене.

9И рече:- Иди кажи на тия люде: С уши непрестанно ще чуете, но няма да схванете, И с очи непрестанно ще видите, но няма да разберете.

10Направи да затлъстее сърцето на тия люде, И направи да натегнат ушите им, и затвори очите им, Да не би да гледат с очите си, и да слушат с ушите си, И да разберат със сърцето си, и да се обърнат та се изцелят.

11Тогава рекох: Господи, до кога? И Той отговори: Докато запустеят градовете та да няма жител, И къщите та да няма човек, И страната да запустее съвсем,-

12Докато отдалечи Господ човеците, И напуснатите места всред земята бъдат много.

13Но още ще остане в нея една десета част, И тя ще бъде погризена; Но както на теревинта и дъба Пънът им остава, когато се отсекат, Така светият род ще бъде пъна й.

 
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English
Reading: Isaiah 6

In the year that King Uzziah died, I saw the Lord, high and exalted, seated on a throne; and the train of his robe filled the temple. 2 Above him were seraphim, each with six wings: With two wings they covered their faces, with two they covered their feet, and with two they were flying. 3 And they were calling to one another:

“Holy, holy, holy is the Lord Almighty;
   the whole earth is full of his glory.”

4 At the sound of their voices the doorposts and thresholds shook and the temple was filled with smoke.

5 “Woe to me!” I cried. “I am ruined! For I am a man of unclean lips, and I live among a people of unclean lips, and my eyes have seen the King, the Lord Almighty.”

6 Then one of the seraphim flew to me with a live coal in his hand, which he had taken with tongs from the altar. 7 With it he touched my mouth and said, “See, this has touched your lips; your guilt is taken away and your sin atoned for.”

8 Then I heard the voice of the Lord saying, “Whom shall I send? And who will go for us?”

And I said, “Here am I. Send me!”

9 He said, “Go and tell this people:

“‘Be ever hearing, but never understanding;
   be ever seeing, but never perceiving.’
10 Make the heart of this people calloused;
   make their ears dull
   and close their eyes.[a]
Otherwise they might see with their eyes,
   hear with their ears,
   understand with their hearts,
and turn and be healed.”

11 Then I said, “For how long, Lord?”

And he answered:

“Until the cities lie ruined
   and without inhabitant,
until the houses are left deserted
   and the fields ruined and ravaged,
12 until the Lord has sent everyone far away
   and the land is utterly forsaken.
13 And though a tenth remains in the land,
   it will again be laid waste.
But as the terebinth and oak
   leave stumps when they are cut down,
   so the holy seed will be the stump in the land.”

 
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Greek
(ελληνικά)
Reading: Isaiah 6

Κατα το ετος εν ω απεθανεν Οζιας ο βασιλευς, ειδον τον Κυριον καθημενον επι θρονου υψηλου και επηρμενου, και το κρασπεδον αυτου εγεμισε τον ναον.

2 Ανωθεν αυτου ισταντο Σεραφειμ ανα εξ πτερυγας εχοντα εκαστον με τας δυο εκαλυπτε το προσωπον αυτου και με τας δυο εκαλυπτε τους ποδας αυτου και με τας δυο επετα.

3 Και εκραζε το εν προς το αλλο και ελεγεν, Αγιος, αγιος, αγιος ο Κυριος των δυναμεων πασα η γη ειναι πληρης της δοξης αυτου.

4 Και οι παρασταται της θυρας εσεισθησαν εκ της φωνης του κραζοντος, και ο οικος επλησθη καπνου.

5 Τοτε ειπα, Ω ταλας εγω διοτι εχαθην επειδη ειμαι ανθρωπος ακαθαρτων χειλεων και κατοικω εν μεσω λαου ακαθαρτων χειλεων επειδη οι οφθαλμοι μου ειδον τον Βασιλεα, τον Κυριον των δυναμεων.

6 Τοτε επετασε προς εμε εν εκ των Σεραφειμ εχον εν τη χειρι αυτου ανθρακα πυρος, τον οποιον ελαβε δια της λαβιδος απο του θυσιαστηριου.

7 Και ηγγισεν αυτον εις το στομα μου και ειπεν, Ιδου, τουτο ηγγισε τα χειλη σου και η ανομια σου εξηλειφθη και η αμαρτια σου εκαθαρισθη.

8 Και ηκουσα την φωνην του Κυριου, λεγοντος, Τινα θελω αποστειλει, και τις θελει υπαγει δια ημας; Τοτε ειπα, Ιδου, εγω, αποστειλον με.

9 Και ειπεν, Υπαγε και ειπε προς τουτον τον λαον, με την ακοην θελετε ακουσει και δεν θελετε εννοησει και βλεποντες θελετε ιδει και δεν θελετε καταλαβει

10 επαχυνθη η καρδια του λαου τουτου, και εγειναν βαρεα τα ωτα αυτων, και εκλεισαν τους οφθαλμους αυτων, δια να μη βλεπωσι με τους οφθαλμους αυτων και ακουωσι με τα ωτα αυτων και νοησωσι με την καρδιαν αυτων και επιστρεψωσι και θεραπευθωσι.

11 Τοτε ειπα, Κυριε, εως ποτε; Και απεκριθη, Εωσου ερημωθωσιν αι πολεις, ωστε να μη υπαρχη κατοικος, και αι οικιαι, ωστε να μη υπαρχη ανθρωπος, και η γη να ερημωθη πανταπασιν

12 και απομακρυνη ο Κυριος τους ανθρωπους, και γεινη μεγαλη εγκαταλειψις εν τω μεσω της γης.

13 Ετι ομως θελει μεινει εν αυτη εν δεκατον, και αυτο παλιν θελει καταφαγωθη καθως η τερεβινθος και η δρυς, των οποιων ο κορμος μενει εν αυταις οταν κοπτωνται, ουτω το αγιον σπερμα θελει εισθαι ο κορμος αυτης.

 
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Reading: Isaiah 6

1जिस वर्ष राजा उज्जिय्याह की मृत्यु हुई, मैंने अपने अद्भुत स्वामी के दर्शन किये। वह एक बहुत ऊँचे सिंहासन पर विराजमान था। उसके लम्वे चोगे से मन्दिर भर गया था। 2यहोवा के चारों ओर साराप स्वर्गदूत खड़े थे। हर साराप (स्वर्गदूत) के छः छः पंख थे। इनमें से दो पंखों का प्रयोग वे अपने मुखों को ढकने के लिए किया करते थे तथा दो पंखों का प्रयोग अपने पैरों को ढकने के लिये करते थे और दो पंखों को वे उड़ने के काम में लाते थे। 3हर स्वर्गदूत दूसरे स्वर्गदूत से पुकार—पुकार कर कह रहे थे, “पवित्र, पवित्र, पवित्र, सर्वशक्तिशाली यहोवा परम पवित्र है! यहोवा की महिमा सारी धरती पर फैली है।” स्वर्गदूतों की वाणी के स्वर बहुत ऊँचे थे। 4स्वर्गदूतों की आवाज़ से द्वार की चौखटें हिल उठीं और फिर मन्दिर धुएँ6:4 फिर मन्दिर धुएँ यह दिखाता है कि परमेश्वर मन्दिर के भीतर था। देखें निर्गमन 40:35 से भरने लगा।

5मैं बहुत डर गया था। मैंने कहा, “अरे, नहीं! मैं तो नष्ट हो जाऊँगा। मैं उतना शुद्ध नहीं हूँ कि परमेश्वर से बातें करूँ और मैं ऐसे लोगों के बीच रहता हूँ जो उतने शुद्ध नहीं हैं कि परमेश्वर से बातें कर सकें। किन्तु फिर भी मैंने उस राजा, सर्वशक्तिमान यहोवा, के दर्शन कर लिये हैं।”

6वहाँ वेदी पर आग जल रही थी। उन साराप (स्वर्गदूतों) में से एक ने उस आग में से चिमटे से एक दहकता हुआ कोयला उठा लिया और 7उस दहकते हुए कोयले से मेरे मुख को छूआ दिया। फिर उस साराप (स्वर्गदूत) ने कहा! “देख! क्योंकि इस दहकते कोयले ने तेरे होठों को छू लिया है, सो तूने जो बुरे काम किये हैं, वे अब तुझ में से समाप्त हो गये हैं। अब तेरे पाप धो दिये गये हैं।”

8इसके बाद मैंने अपने यहोवा की आवाज सुनी। यहोवा ने कहा, “मैं किसे भेज सकता हूँ हमारे लिए कौन जायेगा”

सो मैंने कहा, “मैं यहाँ हूँ। मुझे भेज!”

9फिर यहोवा बोला, “जा और लोगों से कह: ‘ध्यान से सुनो, किन्तु समझो मत! निकट से देखो, किन्तु बूझो मत।’ 10लोगों को उलझन में डाल दे। लोगों की जो बातें वे सुनें और देखें, वे समझ न सके। यदि तू ऐसा नहीं करेगा तो लोग उन बातों को जिन्हें वे अपने कानों से सुनते हैं सचमुच समझ जायेंगे। हो सकता है लोग अपने—अपने मन में सचमुच समझ जायें। यदि उन्होंने ऐसा किया तो सम्भव है लोग मेरी ओर मुड़े और चंगे हो जायें (क्षमा पा जायें)!”

11मैंने फिर पूछा, “स्वामी, मैं ऐसा कब तक करता रहूँ”

यहोवा ने उत्तर दिया, “तू तब तक ऐसा करता रह, जब तक नगर उजड़ न जायें और लोग नष्ट न हो जायें। तू तब तक ऐसा करता रह जब तक सभी घर खाली न हो जायें। ऐसा तब तक करता रह जब तक धरती नष्ट होकर उजड़ न जायें।”

12यहोवा लोगों को दूर चले जाने पर विवश करेगा। इस देश में बड़े—बड़े क्षेत्र उजड़ जायेंगे। 13उस प्रदेश में दस प्रतिशत लोग फिर भी बचे रह जायेंगे किन्तु उनको भी फिर से नष्ट कर दिया जायेगा क्योंकि ये लोग बांजवृक्ष के उस पेड़ के समान होंगे जिसके काट दिये जाने के बाद भी उसका तना बचा रह जाता है और ये (बचे हुए लोग) उसी तने के समान होंगे जो फिर से फुटाव ले लेता है।

 
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Hungarian
(Magyar nyelv)
Reading: Isaiah 6

1A mely esztendõben meghala Uzziás király, látám az Urat ülni magas és felemeltetett székben, és palástja betölté a templomot; 2Szeráfok állanak vala felette: mindeniknek hat-hat szárnya vala: kettõvel orczáját fedé be, kettõvel lábait fedé be, és kettõvel lebegett;

3És kiált vala egy a másiknak, és mondá: Szent, szent, szent a seregeknek Ura, teljes mind a [széles] föld az õ dicsõségével!

4És megrendülének az ajtó küszöbei a kiáltónak szavától, és a ház betelt füsttel.

5Akkor mondék: Jaj nékem, elvesztem, mivel tisztátalan ajkú vagyok és tisztátalan ajkú nép közt lakom: hisz a királyt, a seregeknek Urát láták szemeim!

6És hozzám repült egy a szeráfok közül, és kezében eleven szén vala, a melyet fogóval vett volt az oltárról; 7És illeté számat azzal, és mondá: Ímé ez illeté ajkaidat, és hamisságod eltávozott, és bûnöd elfedeztetett.

8És hallám az Úrnak szavát, a ki ezt mondja vala: Kit küldjek el és ki megyen el nékünk? Én pedig mondék: Ímhol vagyok én, küldj el engemet!

9És monda: Menj, és mondd ezt e népnek: Hallván halljatok és ne értsetek, s látván lássatok és ne ismerjetek;

10Kövérítsd meg e nép szívét, és füleit dugd be, és szemeit kend be: ne lásson szemeivel, ne halljon füleivel, ne értsen szívével, hogy meg ne térjen, és meg ne gyógyuljon.

11És én mondék: Meddig [lészen ez] Uram?! És monda: Míg a városok pusztán állanak lakos nélkül, és a házak emberek nélkül, s a föld is puszta lészen;

12És az Úr az embert messze elveti, s nagy pusztaság lészen a földön;

13És ha megmarad még rajta egy tizedrész, ismétlen elpusztul ez is; [de] mint a terpentinfának és cserfának törzsük marad kivágatás után: az õ törzsük szent mag lészen!

 
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Italian
(Italiano)
Reading: Isaiah 6

1Nell’anno della morte del re Uzzia vidi il Signore seduto sopra un trono alto, molto elevato, e i lembi del suo mantello riempivano il tempio. 2Sopra di lui stavano dei serafini, ognuno dei quali aveva sei ali; con due si copriva la faccia, con due si copriva i piedi e con due volava. 3L’uno gridava all’altro e diceva: «Santo, santo, santo è il Signore degli eserciti! Tutta la terra è piena della sua gloria!» 4Le porte furono scosse fin dalle loro fondamenta dalla voce di loro che gridavano, e la casa fu piena di fumo.

5Allora io dissi: «Guai a me, sono perduto! Perché io sono un uomo dalle labbra impure e abito in mezzo a un popolo dalle labbra impure; e i miei occhi hanno visto il Re, il Signore degli eserciti!» 6Ma uno dei serafini volò verso di me, tenendo in mano un carbone ardente, tolto con le molle dall’altare. 7Mi toccò con esso la bocca e disse: «Ecco, questo ti ha toccato le labbra, la tua iniquità è tolta e il tuo peccato è espiato».

8Poi udii la voce del Signore che diceva: «Chi manderò? E chi andrà per noi?» Allora io risposi: «Eccomi, manda me!»

9Ed egli disse: «Va’, e di’ a questo popolo: “Ascoltate, sì, ma senza capire; guardate, sì, ma senza discernere!”

10Rendi insensibile il cuore di questo popolo, rendigli duri gli orecchi e chiudigli gli occhi, in modo che non veda con i suoi occhi, non oda con i suoi orecchi, non intenda con il cuore, non si converta e non sia guarito!»

11E io dissi: «Fino a quando, Signore?» Egli rispose: «Finché le città siano devastate, senza abitanti, non vi sia più nessuno nelle case, e il paese sia ridotto in desolazione;

12finché il Signore abbia allontanato gli uomini, e la solitudine sia grande in mezzo al paese.

13Se vi rimane ancora un decimo della popolazione, esso a sua volta sarà distrutto; ma, come al terebinto e alla quercia, quando sono abbattuti, rimane il ceppo, così rimarrà al popolo, come ceppo, una discendenza santa».

 
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Polish
(Polski)
Reading: Isaiah 6

1 W roku śmierci króla Uzjasza ujrzałem Pana, który zasiadał na wysokim oraz wyniosłym tronie, a skraje jego szaty napełniały Świątynię.

2 Wysoko nad Nim unosili się Serafini, każdy o sześciu skrzydłach; dwoma zasłaniał swoje oblicze, dwoma zasłaniał swoje nogi, a na dwóch się unosił.

3 I odezwał się jeden do drugiego, wołając: Święty, święty, święty WIEKUISTY Zastępów, cała ziemia jest pełną Jego chwały!

4 Zaś na głos wołających zatrzęsły się posady wejścia, a gmach napełnił się dymem.

5 Więc powiedziałem: Biada mi, zginąłem, bowiem me oczy widziały Króla, WIEKUISTEGO Zastępów, a nie jestem człowiekiem czystych ust oraz przebywam wśród narodu także nieczystych ust.

6 Ale nadleciał do mnie jeden z Serafinów, a w jego ręce był rozżarzony kamyk, który wziął kleszczami z ołtarza.

7 I dotknął moich ust oraz powiedział: Oto dotykam twych ust i znika twoja wina, a twój grzech będzie odpuszczony.

8 Wtedy usłyszałem głos Pana, który mówił: Kogóż mam posłać i kto nam pójdzie? Więc powiedziałem: Oto jestem, poślij mnie.

9 A na to powiedział: Pójdziesz i powiesz temu narodowi: Słyszeć – słyszycie, ale nie chcecie rozumieć; patrzeć patrzycie, ale nie chcecie poznawać.

10 Znieczul serce tego narodu, obciąż jego uszy i odwróć jego oczy, aby nie widział swoimi oczyma, nie słyszał uszami, nie rozumiał sercem oraz się nie nawrócił, aby był uzdrowiony.

11 Więc powiedziałem: Jak długo, Panie? Zatem rzekł: Dopóki nie opustoszeją miasta z powodu braku mieszkańców, domy z powodu braku ludzi, a ziemia nie spustoszeje jak step.

12 WIEKUISTY wydali człowieka i wielką będzie pustka wśród ziemi.

13 A jeśli jeszcze w niej zostanie dziesiąta cześć, ta również będzie zniszczona. Ale jak u sosny lub dębu, u których po zrzuceniu liści zostaje pień – tak i jej pień pozostanie świętym filarem.

 
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Portuguese
(Português)
Reading: Isaiah 6

No ano em que morreu o rei Uzias, eu vi o Senhor assentado sobre um alto e sublime trono, e as abas de seu manto enchiam o templo.

2 2 Ez 1.11; Ap 4.8Acima dele havia serafins; cada um tinha seis asas; com duas cobriam o rosto, com duas cobriam os pés e com duas voavam.

3 3 Sl 72.19; Ap 4.8E clamavam uns aos outros: Santo, santo, santo é o Senhor dos Exércitos; toda a terra está cheia da sua glória.

4 4 Êx 19.18; Am 9.1; Ap 15.8E as bases das portas tremeram à voz do que clamava, e a casa se encheu de fumaça.

5 5 Jz 13.22; Jr 1.6; Lc 5.8Então eu disse: Ai de mim! Estou perdido; porque sou homem de lábios impuros e habito no meio de um povo de lábios impuros; e os meus olhos viram o rei, o Senhor dos Exércitos!

6 6 Ap 8.3 Então, um dos serafins voou até mim, trazendo na mão uma brasa viva, que havia tirado do altar com uma tenaz;

7 7 Jr 1.9; Dn 10.16e tocou-me a boca com a brasa e disse: Agora isto tocou os teus lábios; a tua culpa foi tirada, e o teu pecado, perdoado.

8 8 Ez 33.7; Rm 10.15 Depois disso, ouvi a voz do Senhor, que dizia: A quem enviarei? Quem irá por nós? Eu disse: Aqui estou eu, envia-me.

9 9 Lc 8.10; Jo 12.40; At 28.26-27; Rm 11.8Ele então disse: Vai e diz a este povo: Ouvindo, ouvireis, e nunca entendereis; e, vendo, vereis, e jamais percebereis.

10 10 Sl 119.70; Jr 5.21; Mc 4.12; Jo 12.40Torna o coração deste povo insensível; que os seus ouvidos fiquem surdos, e os seus olhos, cegos, para que não veja com os olhos, não ouça com os ouvidos, nem entenda com o coração, e não se converta nem seja curado.

11 11 Sl 79.5; Mq 3.12Então eu disse: Até quando, Senhor? Ele respondeu: Até que as cidades estejam assoladas e fiquem sem habitantes, as casas sem moradores, e a terra esteja completamente desolada,

12 12 2Rs 25.21e o Senhor tenha lançado toda a população para longe dela e a terra esteja totalmente abandonada.

13 13 Ed 9.2; Jó 14.7; Rm 11.5Mas, se ainda restar nela a décima parte, também será destruída, como o terebinto e o carvalho que, depois de derrubados, ainda deixam o toco. A santa semente é o seu toco.

 
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Reading: Isaiah 6

1În anul morții regelui Uzia, L-am văzut pe Iahve stând pe un tron înalt și impunător. Marginea robei Lui umplea templul. 2Deasupra Lui stăteau serafimi. Fiecare dintre ei avea șase aripi. Cu două dintre ele își acopereau fețele; cu două își acopereau picioarele, iar cu două zburau. 3Strigau unul spre altul, zicând: „Iahve, Dumnezeul Armatelor, este sfânt, sfânt, sfânt! Tot pământul este plin de gloria Lui!” 4Stâlpii și pragurile ușilor s-au cutremurat de vocea lor, iar casa s-a umplut de fum. 5Am strigat: „Vai de mine! Sunt în mare pericol; pentru că sunt un om cu buze necurate și trăiesc în mijlocul unui popor cu buze tot necurate. Ochii mei l-au văzut pe Rege – pe Iahve, pe Dumnezeul Armatelor!” 6Atunci unul dintre serafimi a zburat spre mine cu un cărbune aprins în mână pe care îl luase cu cleștele de pe altar. 7Mi-a atins gura cu el; și a zis: „Acum, după ce ți-am atins buzele cu acest cărbune, vina ta este anulată și plata pentru păcatul tău este achitată!” 8Apoi am auzit vocea lui Iahve, întrebând: „Pe cine să trimit? Cine va merge pentru Noi?” Atunci eu am zis: „Sunt aici! Trimite-mă!” 9El a zis: „Du-te la oamenii care formează acest popor; și spune-le: «Să ascultați continuu, dar să nu înțelegeți; și să priviți mereu, dar să nu vedeți!» 10Fă insensibilă inima oamenilor din acest popor! Fă urechile lor să audă greu și închide-le ochii – ca să nu aibă nicio șansă să vadă cu ochii lor, să audă cu urechile, să înțeleagă cu inima, să se întoarcă la Mine și astfel să fie (cumva) vindecați!” 11Atunci am întrebat: „Până când, Doamne?” El mi-a răspuns: „Până când orașele vor fi transformate în ruină și vor rămâne fără locuitori, până când casele vor rămâne goale, iar terenurile agricole vor fi devastate și vor ajunge fără vegetație; 12până când Iahve îi va trimite pe toți departe, iar țara va rămâne total abandonată. 13Chiar dacă zece la sută din populația țării va rămâne în ea, va fi devastată din nou. Dar așa cum unui terebint sau unui stejar îi rămâne trunchiul (și rădăcina) atunci când este tăiat, în mod asemănător și sămânța sfântă va fi ca un trunchi în țară.”

 
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Somali
(Soomaali)
Reading: Isaiah 6

1Sannaddii Boqor Cusiyaah dhintay ayaan arkay Rabbiga oo ku fadhiya carshi sare oo dheer, oo faraqii dharkiisa ayaa macbudkii buuxiyey. 2Oo meel isaga ka sarraysayna waxaa taagnaa seraafiim, oo midkood kastaaba wuxuu lahaa lix baal, laba wejigiisuu ku deday, labana cagihiisuu ku deday, labana wuu ku duulay. 3Oo midba wuxuu u qaylinayay midka kale, oo waxay lahaayeen, Quduus, quduus, quduus waxaa ah Rabbiga ciidammada, oo dhulka oo dhanna waxaa ka buuxda ammaantiisa. 4Oo aasaaska iridda ayaa la gariiray kii qayliyey codkiisii, oo gurigiina waxaa ka buuxsamay qiiq. 5Markaasaan idhi, Anaa hoogay! Waayo, waan lumay, maxaa yeelay, waxaan ahay nin aan bushimihiisu daahirsanayn, oo weliba waxaan dhex degganahay dad aan bushimahoodu daahirsanayn, waayo, indhahaygu waxay arkeen Boqorka ah Rabbiga ciidammada. 6Markaasaa seraafiimtii midkood xaggayga u soo duulay isagoo gacanta ku sida dhuxul nool, oo uu birqaab kaga soo qaaday meeshii allabariga, 7oo intuu dhuxushii afkayga taabsiiyey ayuu igu yidhi, Bal eeg, tanu waxay taabatay bushimahaaga, oo xumaantaadii waa lagaa qaaday, oo dembigaagiina waa lagaa kafaaragguday. 8Oo weliba waxaan maqlay codkii Rabbiga oo leh, Yaan diraa? Yaase noo tegaya? Markaasaan idhi, Waa i kane aniga i dir. 9Oo wuxuu igu yidhi, Tag, oo dadkan waxaad ku tidhaahdaa, Wax sii maqla, mana garan doontaan, oo wax sii arka, idiinmana dhaadhici doonto. 10Dadkan qalbigooda ka dhig mid qallafsan, dhegahoodana kuwa dhib wax ku maqla, indhahoodana kuwa xidhan, si aanay indhaha wax ugu arkin, oo aanay dhegaha wax ugu maqlin, oo aanay qalbiga wax ugu garan, oo aanay u soo noqon, oo aanay u bogsan. 11Markaasaan idhi, Sayidow, waa ilaa goorma? Oo isna wuxuu iigu jawaabay, Waa ilaa magaalooyinku baabba'aan oo wax deggan laga waayo, oo guryuhuna ay noqdaan cidla, oo dalkuna uu dhammaantiis wada baabba'o, 12oo Rabbigu dadka ka fogeeyo, oo ay dhulka ku bataan meelo badan oo laga tegey. 13Oo haddii dhexdiisa toban meelood meel ku hadho way baabbi'i doontaa, oo sida geedo marka la gooyo jiridu u hadho ayaa farcanka quduuska ahu dadka jirid u yahay.

 
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Turkish
(Türkçe)
Reading: Isaiah 6

 2Kr.15:7; 2Ta.26:23 Kral Uzziya'nın öldüğü yıl yüce ve görkemli Rab'bi gördüm; tahtta oturuyordu, giysisinin etekleri tapınağı dolduruyordu. 2Üzerinde Seraflar duruyordu; her birinin altı kanadı vardı; ikisiyle yüzlerini, ikisiyle ayaklarını örtüyor, öbür ikisiyle de uçuyorlardı. 3Va.4:8 Birbirlerine şöyle sesleniyorlardı:

“Her Şeye Egemen RAB

Kutsal, kutsal, kutsaldır.

Yüceliği bütün dünyayı dolduruyor.”

4 Va.15:8 Seraflar'ın sesinden kapı söveleriyle eşikler sarsıldı, tapınak dumanla doldu.

5“Vay başıma! Mahvoldum” dedim, “Çünkü dudakları kirli bir adamım, dudakları kirli bir halkın arasında yaşıyorum. Buna karşın Kral'ı, Her Şeye Egemen RAB'bi gözlerimle gördüm.”

6Seraflar'dan biri bana doğru uçtu, elinde sunaktan maşayla aldığı bir kor vardı; 7onunla ağzıma dokunarak, “İşte bu kor dudaklarına değdi, suçun silindi, günahın bağışlandı” dedi.

8Sonra Rab'bin sesini işittim: “Kimi göndereyim? Bizim için kim gidecek?” diyordu.

“Ben! Beni gönder” dedim.

9 Mat.13:14-15; Mar.4:12; Luk.8:10; Yu.12:39-40; Ha.İş.8:26-27 “Git, bu halka şunu duyur” dedi,

“ ‘Duyacak duyacak, ama anlamayacaksınız,

Bakacak bakacak, ama görmeyeceksiniz!

10Bu halkın yüreğini duygusuzlaştır,

Kulaklarını ağırlaştır,

Gözlerini kapat.

Öyle ki, gözleri görmesin,

Kulakları duymasın, yürekleri anlamasın

Ve bana dönüp şifa bulmasınlar.’ ”

11“Ne vakte kadar, ya Rab?” diye sordum.

Rab yanıtladı:

“Kentler viraneye dönüp kimsesiz kalıncaya,

Evler ıpıssız oluncaya,

Toprak büsbütün kıraçlaşıncaya kadar.

12İnsanları çok uzaklara süreceğim,

Ülke bomboş kalacak,

13Halkın onda biri kalsa da ülke mahvolacak.

Ama devrildiği zaman kütüğü kalan

Yabanıl fıstık ve meşe ağacı gibi,

Kutsal soy kütüğünden çıkacak.”

 
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Reading: Isaiah 6

1Року смерти царя Озії бачив я Господа, що сидів на високому та піднесеному престолі, а кінці одежі Його переповнювали храм.

2Серафими стояли зверху Його, по шість крил у кожного: двома закривав обличчя своє, і двома закривав ноги свої, а двома літав. 3І кликав один до одного й говорив: Свят, свят, свят Господь Саваот, уся земля повна слави Його! 4І захиталися чопи порогів від голосу того, хто кликав, а храм переповнився димом! 5Тоді я сказав: Горе мені, бо я занапащений! Бо я чоловік нечистоустий, і сиджу посеред народу нечистоустого, а очі мої бачили Царя, Господа Саваота!

6І прилетів до мене один з Серафимів, а в руці його вугіль розпалений, якого він узяв щипцями з-над жертівника. 7І він доторкнувся до уст моїх та й сказав: Ось доторкнулося це твоїх уст, і відійшло беззаконня твоє, і гріх твій окуплений. 8І почув я голос Господа, що говорив: Кого Я пошлю, і хто піде для Нас? А я відказав: Ось я, пошли Ти мене! 9А Він проказав: Іди, і скажеш народові цьому: Ви будете чути постійно, та не зрозумієте, і будете бачити завжди, але не пізнаєте.

10Учини затужавілим серце народу цього, і тяжкими зроби його уші, а очі йому позаклеюй, щоб не бачив очима своїми, й ушима своїми не чув, і щоб не зрозумів своїм серцем, і не навернувся, і не був уздоровлений він! 11І сказав я: Аж доки, о Господи? А Він відказав: Аж доки міста спустіють без мешканця, і доми без людей, а земля спустошена буде зовсім... 12І віддалить людину Господь, і буде велике опущення серед землі... 13І коли позостанеться в ній ще десята частина, вона знову спустошена буде... Але мов з теребинту й мов з дубу, зостанеться в них пень по зрубі, насіння бо святости пень їхній!

 
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Reading: Isaiah 6

1جِس سال میں عُزیّاہ بادشاہ نے وفات پائی مَیں نے خُداوند کو ایک بڑی بُلندی پر اُونچے تخت پر بَیٹھے دیکھا اور اُس کے لِباس کے دامن سے ہَیکل معمُور ہو گئی۔ 2اُس کے آس پاس سرافِیم کھڑے تھے جِن میں سے ہر ایک کے چھ بازُو تھے اور ہر ایک دو سے اپنا مُنہ ڈھانپے تھا اور دو سے پاؤں اور دو سے اُڑتا تھا۔ 3اور ایک نے دُوسرے کو پُکارا اور کہا

قُدُّوس قُدُّوس قُدُّوس

ربُّ الافواج ہے۔

ساری زمِین اُس کے جلال سے معمُور ہے۔

4اور پُکارنے والے کی آواز کے زور سے آستانوں کی بُنیادیں ہِل گئِیں اور مکان دُھوئیں سے بھر گیا۔

5تب مَیں بول اُٹھا کہ مُجھ پر افسوس! مَیں تو برباد ہُؤا! کیونکہ میرے ہونٹ ناپاک ہیں اور نِجس لب لوگوں میں بستا ہُوں کیونکہ میری آنکھوں نے بادشاہ ربُّ الافواج کو دیکھا۔

6اُس وقت سرافِیم میں سے ایک سُلگا ہُؤا کوئلہ جو اُس نے دست پناہ سے مذبح پر سے اُٹھا لِیا اپنے ہاتھ میں لے کر اُڑتا ہُؤا میرے پاس آیا۔ 7اور اُس سے میرے مُنہ کو چُھؤا اور کہا دیکھ اِس نے تیرے لبوں کو چُھؤا۔ پس تیری بدکرداری دُور ہُوئی اور تیرے گُناہ کا کفّارہ ہو گیا۔

8اُس وقت مَیں نے خُداوند کی آواز سُنی جِس نے فرمایا مَیں کِس کو بھیجُوں اور ہماری طرف سے کَون جائے گا؟

تب مَیں نے عرض کی مَیں حاضِر ہُوں مُجھے بھیج۔

9اور اُس نے فرمایا جا اور اِن لوگوں سے کہہ کہ تُم سُنا کرو پر سمجھو نہیں۔ تُم دیکھا کرو پر بُوجھو نہیں۔ 10تُو اِن لوگوں کے دِلوں کو چربا دے اور اُن کے کانوں کو بھاری کر اور اُن کی آنکھیں بند کر دے تا نہ ہو کہ وہ اپنی آنکھوں سے دیکھیں اور اپنے کانوں سے سُنیں اور اپنے دِلوں سے سمجھ لیں اور باز آئیں اور شِفا پائیں۔

11تب مَیں نے کہا اَے خُداوند یہ کب تک؟

اُس نے جواب دِیا جب تک بستِیاں وِیران نہ ہوں اور کوئی بسنے والا نہ رہے اور گھر بے چراغ نہ ہوں اور زمِین سراسر اُجاڑنہ ہو جائے۔ 12اور خُداوند آدمِیوں کو دُور کر دے اور اِس سرزمِین میں مترُوک مقام بکثرت ہوں۔ 13اور اگر اُس میں دسواں حِصّہ باقی بھی بچ جائے تو وہ پِھر بھسم کِیا جائے گا لیکن وہ بُطم اور بلُوط کی مانِند ہو گا کہ باوُجُودیکہ وہ کاٹے جائیں تَو بھی اُن کا ٹُنڈ بچ رہتا ہے۔

سو اُس کا ٹُنڈ ایک مُقدّس تُخم ہو گا۔

 
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Reading: Isaiah 6

1در سالی که عُزّیای پادشاه درگذشت، خداوند را دیدم که بر تختی بلند و رفیع نشسته بود و دامنِ ردایش معبد را پر ساخته بود. 2بر فراز او سَرافین6‏:2 احتمالاً به موجودات آسمانی آتشین اشاره دارد. ایستاده بودند. هر یک از آنها شش بال داشت: با دو بال روی خود را می‌پوشانید، با دو بال پا‌های خود را، و با دو بال نیز پرواز می‌کرد. 3هر یک از آنها به دیگری ندا در داده، می‌گفت:

«قدوس، قدوس، قدوس است خداوندِ لشکرها؛

تمامی زمین از جلال او مملو است.»

4پایه‌های آستانه از آوای او که ندا می‌کرد می‌لرزید و خانه از دود آکنده بود. 5پس گفتم: «وای بر من که هلاک شده‌ام! زیرا که مردی ناپاک لب هستم و در میان قومی ناپاک لب ساکنم، و چشمانم پادشاه، خداوند لشکرها را دیده است!»

6آنگاه یکی از سَرافین پروازکنان نزد من آمد. او در دست خود اَخگری داشت که با انبُر از مذبح برگرفته بود. 7با آن دهانم را لمس کرد و گفت: «هان، این لبانت را لمس کرده است؛ تقصیرت رفع شده و گناهت کفاره گشته است.» 8آنگاه آوای خداوندگار را شنیدم که می‌گفت: «کِه را بفرستم و کیست که برای ما برود؟» گفتم: «لبیک؛ مرا بفرست!» 9فرمود: «برو و به این قوم بگو:

«”همچنان بشنوید، اما نفهمید؛

همچنان ببینید، اما درک نکنید.“

10دل این قوم را سخت ساز،

گوشهایشان را سنگین کن،

و چشمانشان را ببند؛

مبادا با چشمان خود ببینند،

و با گوشهای خود بشنوند،

و با دلهای خویش بفهمند،

و بازگشت کرده، شفا یابند.»6‏:10 در ترجمۀ یونانی هفتادتَنان چنین آمده: «پیوسته خواهید شنید، اما هرگز نخواهید فهمید؛ پیوسته خواهید دید، اما هرگز درک نخواهید کرد. دل این قوم سخت شده است. آنان به‌سختی به گوشهایشان می‌شنوند و چشمانشان را بسته‌اند».

11آنگاه پرسیدم: «خداوندگارا، تا به کِی؟»

پاسخ آمد:

«تا آنگاه که شهرها ویران گشته، از سَکَنه تهی شوند؛

و خانه‌ها بدون آدمی و زمین، خراب و ویران گردد.

12تا آنگاه که خداوند آدمیان را دور سازد،

و در میان این سرزمین مکانهای متروک، بسیار گردد.

13حتی اگر یک‌دهم در آن باقی مانند،

دیگر بار سوخته6‏:13 یا ”تصفیه“. خواهد شد؛

مانند درخت بلوط یا چنار،

که چون قطع شود

کُنده‌اش باقی می‌ماند.

ذریتِ مقدسْ کُندۀ آن خواهد بود.»